वित्तीय प्रबन्ध : अर्थ एवं परिभाषा (Financial Management : Meaning and Definition )

जैसा कि पूर्व में बतलाया गया है, वित्त का अध्ययन वर्णात्मक न रहकर पूर्ण रूप से विश्लेषणात्मक एवं निर्णयात्मक हो गया है तथा इस विषय का क्षेत्र भी विस्तृत हो गया है। अतः परम्परागत विचारधारा के अन्तर्गत जिसमें 'निगम वित्त' (Corporation Finance) या ‘व्यावसायिक वित्त ' ( Business Finance) मानकर अध्ययन करते थे, आधुनिक विचारधारा के अर्न्तगत उसे 'प्रबन्धकीय वित्त' (Managerial Finance) या 'वित्तीय प्रबन्ध' (Financial Management) मानकर अध्ययन करते हैं। वित्तीय प्रबंध शब्द दो शब्दों 'वित्तीय' तथा 'प्रबन्ध' से बना है। वित्तीय शब्द का अर्थ है-धन प्राप्ति के साधनों को जुटाना तथा व्यवसाय की मौद्रिक आवश्यकताओं का पूर्वानुमान लगाकर उनके आधार पर इन साधनों का आवंटन करना । प्रबन्ध शब्द से अभिप्राय किसी संस्था के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए मानवीय क़ियाओं और भौतिक संसाधनों के नियोजन, संगठन, समन्वय एवं नियंत्रण से है। इस प्रकार, वित्तीय प्रबन्ध व्यावसायिक प्रबन्ध की वह शाखा है जो संस्था के वित्तीय संसाधनों के नियोजन एवं नियंत्रण से सम्बन्धित हैं अर्थात् वित्त कार्य का प्रबन्ध । दूसरे शब्दों में, वित्तीय प्रबन्ध मुद्रा प्रबन्ध के उपाय एवं साधन (ways and means) के रूप में है अर्थात् वित्तीय संसाधनों का निर्धारण, प्राप्ति, आबंटन एवं उपयोग है ।

इस प्रकार वित्तीय प्रबन्ध उन प्रबन्धकीय निर्णयों से संबंधित है जिनका परिणाम संस्था की दीर्घकालीन एवं अल्पकालीन सम्पत्तियों की प्राप्ति एवं वित्त पूर्ति है । इन निर्णयों का विश्लेषण कोषों के अपेक्षित अंतर्वाह, बहिर्वाह एवं प्रबंधकीय उद्देश्यों पर पड़ने वाले प्रभावों पर आधारित होता है। हावर्ड एवं उपटन के शब्दों में, "नियोजन एवं नियंत्रण कार्य को वित्तीय कार्यों पर लागू करना वित्तीय प्रबन्ध है।''" व्हिलर के अनुसार, “वित्तीय प्रबन्ध का आशय उस क्रिया से होता है, जो उपक्रम के उद्देश्यों एवं वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पूंजी कोषों के संग्रहण एवं उनके प्रशासन से संबंध रखती है। 22 जोसेफ एफ ब्रेडले के शब्दों में, “वित्तीय प्रबन्ध व्यावसायिक प्रबन्ध का वह क्षेत्र है जिसका संबंध पूंजी के विवेकपूर्ण उपयोग एवं वित्तीय स्रोतों के सतर्कतापूर्ण चयन से है, ताकि व्यवसाय को इसके उद्देश्यों की पूर्ति की दिशा में निर्देशित किया जा सके।''3 जे. एल. मैसी के अनुसार, ‘“वित्तीय प्रबन्ध व्यवसाय की वह परिचालनात्मक क्रिया है जो उपक्रम के कुशलतापूर्वक संचालन के लिए आवश्यक वित्त प्राप्ति एवं उसके प्रभावशाली उपयोग हेतु उत्तरदायी होती है।”4

उपर्युक्त विवेचन के आधार पर संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि वित्तीय प्रबन्ध व्यावसायिक प्रबन्ध का एक कार्यात्मक क्षेत्र (Functional Area) है। यह सम्पूर्ण प्रबन्ध का एक भाग है। इसका संबंध मुख्यतः आर्थिक दृष्टि से सर्वाधिक उपयुक्त विधि द्वारा कोषों की प्राप्ति, इन कोषों का लाभप्रद उपयोग, भावी क्रियाओं का नियोजन तथा वित्तीय लेखांकन, लागत लेखांकन, बजटन, सांख्यिकी व अन्य विधियों द्वारा चालू निष्पत्तियों के नियंत्रण से है।

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